आखिर फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही मेकर्स को टाइटल क्यों बदलना पड़ा? क्या यह कोई सेंसर बोर्ड का दबाव था या कहानी में कोई बड़ा बदलाव किया गया है? इन तमाम सवालों का जवाब अब फिल्म के डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने दिया है।
क्यों बदला गया फिल्म का नाम?
फिल्म के टाइटल चेंज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
कइयों का मानना था कि राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण 'गलवान' शब्द को हटाया गया है। हालांकि, डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए असली वजह बताई है।
अपूर्व के अनुसार, "बैटल ऑफ गलवान एक बहुत ही विशिष्ट (Specific) घटना पर आधारित नाम लग रहा था।
जबकि हमारी फिल्म की कहानी सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है। यह फिल्म देशभक्ति, बलिदान और शांति के एक बड़े संदेश को समेटे हुए है। 'मातृभूमि' शब्द हर भारतीय के दिल के करीब है और यह फिल्म के इमोशनल कनेक्ट को और गहरा बनाता है।"
'मे वॉर रेस्ट इन पीस' टैगलाइन का महत्व
टाइटल के साथ जुड़ी टैगलाइन 'May War Rest In Peace' भी काफी चर्चा बटोर रही है।
अपूर्व लाखिया ने स्पष्ट किया कि यह फिल्म युद्ध को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि उन सैनिकों के सम्मान में है जो शांति के लिए अपनी जान दांव पर लगा देते हैं। मेकर्स चाहते थे कि टाइटल से ही यह साफ हो जाए कि फिल्म का उद्देश्य युद्ध की विभीषिका को दिखाना और शांति की अपील करना है।
फिल्म 'मातृभूमि' की कहानी और सलमान का किरदार
सूत्रों की मानें तो इस फिल्म में सलमान खान एक ऐसे जांबाज ऑफिसर की भूमिका निभा रहे हैं, जो न केवल सीमा पर लड़ता है, बल्कि युद्ध के मनोवैज्ञानिक पहलुओं से भी गुजरता है। फिल्म में 2020 की गलवान घाटी की झड़प के कुछ प्रेरित अंश जरूर होंगे, लेकिन अब इसे एक व्यापक कैनवास पर पेश किया जाएगा।
• एक्शन: फिल्म में हाई-ऑक्टेन एक्शन सीक्वेंस होंगे।
• इमोशन: सैनिकों के परिवार और उनके व्यक्तिगत संघर्ष को प्रमुखता दी जाएगी।
• लोकेशन: फिल्म की शूटिंग लद्दाख और कश्मीर की वास्तविक लोकेशंस पर की जा रही है।
फैंस का रिएक्शन: सोशल मीडिया पर मिक्स्ड रिस्पॉन्स
जैसे ही सलमान खान ने 'मातृभूमि' का नया पोस्टर शेयर किया, कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
1. सपोर्ट: ज्यादातर फैंस का मानना है कि 'मातृभूमि' नाम में एक अलग ही वजन और गहराई है।
2. सवाल: कुछ लोग अब भी पुराने नाम को ज्यादा प्रभावशाली मान रहे थे क्योंकि वह सीधे तौर पर भारतीय सेना की बहादुरी से जुड़ा था।
हालांकि, सलमान की ब्रांड वैल्यू ऐसी है कि फिल्म का नाम कुछ भी हो, उनके फैंस थिएटर तक खिंचे चले आते हैं।
अपूर्व लाखिया और सलमान खान की जोड़ी
अपूर्व लाखिया 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी इंटेंस फ़िल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं।
यह पहली बार है जब वह सलमान खान के साथ किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। अपूर्व का कहना है कि सलमान इस रोल के लिए उनकी पहली पसंद थे क्योंकि उनके अंदर वो 'माचो मैन' इमेज के साथ-साथ एक भावुक भारतीय की छवि भी है।
रिलीज डेट और अन्य स्टारकास्ट
फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन चर्चा है कि इसमें साउथ और बॉलीवुड के कुछ बड़े नाम अहम भूमिकाओं में नजर आ सकते हैं। फिल्म को अगले साल के अंत तक बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी है।
निष्कर्ष
सलमान खान की 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सेना के अदम्य साहस को एक ट्रिब्यूट है। टाइटल का बदलना फिल्म की मेकिंग का एक हिस्सा है, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए लिया गया फैसला है। अब देखना यह होगा कि सलमान खान 'टाइगर' की छवि से बाहर निकलकर इस गंभीर वॉर-ड्रामा में क्या कमाल दिखाते हैं।
क्या आपको लगता है कि 'मातृभूमि' नाम 'बैटल ऑफ गलवान' से बेहतर है?
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