LPG Crisis In India: गैस की किल्लत से होटल-रेस्टोरेंट में हड़कंप, इन देशों से 90% सप्लाई बाधित, जानिए कितना बड़ा है संकट

LPG Crisis in India: भारत में एलपीजी का भारी संकट, मिडिल-ईस्ट युद्ध का असर | UkTvGlobal.in

LPG की किल्लत से होटल-रेस्टोरेंट में हड़कंप, इन देशों से 90% गैस की सप्लाई, जानिए कितना बड़ा है संकट

रिपोर्टर: मो हाशिम | स्थान: नई दिल्ली | दिनांक: 11 मार्च, 2026 | UkTvGlobal.in

LPG Crisis Updates India: भारत इस समय एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है। देश के प्रमुख महानगरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक रसोई गैस (LPG) की सप्लाई चेन चरमरा गई है। आलम यह है कि गैस वितरकों के पास स्टॉक खत्म हो रहा है और बुकिंग के 10-10 दिनों बाद भी डिलीवरी नहीं मिल पा रही है। इस संकट ने सबसे ज्यादा प्रभावित 'होस्पिटलिटी सेक्टर' यानी होटल और रेस्टोरेंट को किया है, जहाँ कमर्शियल गैस की भारी किल्लत के कारण कई छोटे प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं।

लेकिन सवाल यह उठता है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि भारत जैसा बड़ा देश गैस की कमी से जूझने लगा? इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है—मिडिल-ईस्ट (Middle-East) का भीषण युद्ध। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने न केवल कच्चे तेल की कीमतों को आग लगाई है, बल्कि एलपीजी की वैश्विक सप्लाई लाइन को भी ठप कर दिया है।

भारत का LPG आयात मॉडल और संकट की गहराई

भारत दुनिया में एलपीजी का दूसरा सबसे बड़ा आयातक (Importer) है। हम अपनी जरूरत का लगभग 65% से अधिक एलपीजी विदेश से खरीदते हैं। भारत की मुख्य निर्भरता खाड़ी देशों पर है। जब भी मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ता है, 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो जाती है। युद्ध के कारण बीमा लागत बढ़ने और रूट बदलने से जहाजों को भारत पहुँचने में पहले के मुकाबले 15 से 20 दिन ज्यादा लग रहे हैं।

बड़ी खबर: भारत सरकार ने संकट को देखते हुए 'नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट' को सक्रिय कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय सीधे तौर पर सप्लायर देशों के साथ संपर्क में है ताकि तेल और गैस के जहाजों को 'ग्रीन कॉरिडोर' के जरिए भारत लाया जा सके।

आंकड़ों की नजर से: कहाँ से आता है भारत का 90% स्टॉक?

आम जनता को यह जानना जरूरी है कि हम किन देशों के भरोसे अपनी रसोई चला रहे हैं। नीचे दी गई तालिका भारत की एलपीजी आयात की पूरी तस्वीर साफ करती है:

आयातक देश (Import Origin) मार्केट शेयर (%) संकट का मुख्य कारण सप्लाई स्टेटस
कतर (Qatar) 35% समुद्री मार्ग पर सैन्य गतिविधियां बेहद धीमी (Delayed)
UAE (अमीरात) 24% शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पोर्ट जाम सीमित (Restricted)
सऊदी अरब 19% उत्पादन कटौती की आशंका सामान्य से कम
कुवैत 12% रिफाइनरी में तकनीकी और सुरक्षा लोड स्थिर लेकिन कम
अन्य (USA/Russia) 10% लंबी दूरी और हाई फ्रेट चार्ज अत्यधिक महंगा

GAIL और ONGC को मिला 'इमरजेंसी टारगेट'

घरेलू बाजार में हाहाकार मचने के बाद केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों GAIL (Gas Authority of India Limited) और ONGC को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वे अपनी रिफाइनरियों में एलपीजी के उत्पादन को प्राथमिकता दें और प्राकृतिक गैस के अन्य उपयोगों में कटौती कर उसे एलपीजी बनाने में डाइवर्ट करें।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) खुद इस स्थिति की निगरानी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च के अंत तक घरेलू स्टॉक को कम से कम 15 दिनों के लिए सुरक्षित रखा जाए। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो अप्रैल के महीने में गैस सिलेंडर की कीमतों में 150 से 200 रुपये तक की भारी बढ़ोत्तरी देखनी पड़ सकती है।

संकट के 5 बड़े प्रभाव:

  • होटल इंडस्ट्री: कमर्शियल सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग शुरू, खाने के दाम बढ़े।
  • आम रसोई: बुकिंग के बाद लंबा वेटिंग पीरियड।
  • अर्थव्यवस्था: आयात बिल बढ़ने से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर।
  • विकल्प: लोगों का फिर से इंडक्शन कुकर और बिजली के चूल्हों की ओर झुकाव।
  • कालाबाजारी: स्टॉक जमाखोरी के कारण सिलेंडर के दामों में मनमानी वसूली।

क्या है भविष्य की राह?

इस संकट ने भारत को एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमें अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए केवल आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। भारत को अपने **'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व'** की तरह ही **'स्ट्रेटेजिक गैस रिजर्व'** बनाने की जरूरत है, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में कम से कम 3 महीने का स्टॉक देश के पास मौजूद रहे।

इसके अलावा, बायो-गैस और इथेनॉल जैसे स्वदेशी विकल्पों पर जोर देना अब मजबूरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। जब तक हम आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक ग्लोबल युद्ध की आंच हमारी रसोई तक पहुँचती रहेगी।

निष्कर्ष: एलपीजी का यह संकट फिलहाल टलता नजर नहीं आ रहा है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाल नहीं होती, तब तक सप्लाई चेन में दिक्कतें बनी रहेंगी। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे पैनिक न करें और गैस का संभलकर उपयोग करें।

MOHD HASIM CEO
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