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असम ग्राउंड रिपोर्ट: अमित शाह और योगी के वायरल बयान पर मचा बवाल, 5 दिनों में गिरफ्तारी की मांग और सैकड़ों FIR दर्ज!

 यह लेख UK TV Global की एक विशेष ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित है, जो असम विधानसभा चुनाव 2026 के माहौल और हालिया राजनीतिक बयानों का गहराई से विश्लेषण करता है।

असम रैली में दिए गए विवादित बयान के बाद अमित शाह और योगी आदित्यनाथ पर सैकड़ों केस दर्ज होने और 5 दिनों में गिरफ्तारी की चेतावनी वाली न्यूज़ थंबनेल इमेज।



UK TV Global Ground Report: असम में नफरती बयानों की बाढ़—अमित शाह और योगी के वायरल वीडियो का सच

गुवाहाटी: असम की शांत वादियों में इस वक्त चुनावी बिगुल नहीं, बल्कि ध्रुवीकरण का शोर गूंज रहा है। UK TV Global की इस विशेष रिपोर्ट में हम पर्दाफाश करेंगे उस चुनावी रणनीति का, जहाँ विकास के दावों के पीछे धर्म और नफरत की राजनीति छिपी है। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के असम रैलियों के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहे हैं, जिन्होंने न केवल राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है, बल्कि अल्पसंख्यकों (मुस्लिमों) के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

1. ग्राउंड रिपोर्ट: क्या है असम का चुनावी मिजाज?

असम विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। UK TV Global की टीम ने जब धुबरी, सोनितपुर और बरछला जैसे क्षेत्रों का दौरा किया, तो वहां सड़कों पर विकास की चर्चा कम और "घुसपैठिए" शब्द की गूंज ज्यादा सुनाई दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव आते ही नेताओं की भाषा बदल जाती है। बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने अपनी रैलियों में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, उसने असम के साझा सामाजिक ताने-बाने पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

2. अमित शाह का 'सोनितपुर' बयान: घुसपैठ के नाम पर घेराबंदी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोनितपुर और धुबरी की रैलियों में सीधे तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाया। उनके वायरल बयान में उन्होंने कहा कि "अगले पांच साल में हम एक-एक घुसपैठिये को चुन-चुनकर असम से बाहर निकालेंगे।"

UK TV Global का विश्लेषण:

अमित शाह के इस बयान को सीधे तौर पर असम के बंगाली भाषी मुस्लिमों के खिलाफ एक हथियार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि वे "घुसपैठिए" शब्द का प्रयोग करते हैं, लेकिन चुनावी रैलियों में उनका इशारा और टोन एक विशेष समुदाय की ओर होता है। इससे न केवल ध्रुवीकरण बढ़ता है, बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठता है।

3. योगी आदित्यनाथ का 'हार्डलाइन' अवतार: लैंड जिहाद और लव जिहाद

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, जो अपनी फायरब्रांड छवि के लिए जाने जाते हैं, ने असम की धरती पर "लैंड जिहाद" और "लव जिहाद" जैसे शब्दों का जमकर प्रयोग किया। उन्होंने विपक्षी दलों—कांग्रेस और एआईयूडीएफ (AIUDF)—पर आरोप लगाया कि उन्होंने घुसपैठियों को पाल-पोसकर असम की डेमोग्राफी बदलने की कोशिश की है।

वायरल बयान का मुख्य अंश:

"कांग्रेस और यूडीएफ ने असम को घुसपैठियों का अड्डा बना दिया है। ये लोग गरीबों का राशन खा जाते थे, लेकिन अब डबल इंजन सरकार में लैंड जिहाद करने वालों की जगह जेल में है।"

इस तरह के बयानों को UK TV Global की टीम ने जब मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सुनाया, तो वहां के युवाओं में भारी आक्रोश दिखा। उनका कहना है कि वे भारतीय नागरिक हैं, लेकिन उन्हें बार-बार "घुसपैठिया" कहकर अपमानित किया जाता है।

4. धर्म को राजनीति में घसीटने की साजिश?

असम में बीजेपी की रणनीति साफ नजर आ रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मिलकर अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की जोड़ी ने चुनाव को "हिंदू बनाम मुस्लिम" के चश्मे से दिखाने की कोशिश की है।

  • ध्रुवीकरण का खेल: विकास के मुद्दों (जैसे बेरोजगारी, बाढ़ नियंत्रण) को पीछे धकेलकर मंदिर, मस्जिद और पहचान की राजनीति को आगे लाया गया है।

  • वोट बैंक की राजनीति: बीजेपी का यह रुख सीधे तौर पर बहुसंख्यक हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश है, जिससे अल्पसंख्यकों को दरकिनार किया जा सके।

5. मुस्लिम समुदाय की चिंताएं और मानवाधिकार

असम के बराक वैली और लोअर असम के मुस्लिम समुदाय के बीच एक अजीब सा सन्नाटा और खौफ है। UK TV Global से बात करते हुए एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, "इन बड़े नेताओं की गंदी सोच ने हमें अपने ही देश में पराया बना दिया है। जब एक मुख्यमंत्री या गृह मंत्री मंच से इस तरह की भाषा बोलते हैं, तो नीचे के कार्यकर्ताओं को हिंसा और नफरत फैलाने का लाइसेंस मिल जाता है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से असम में 1983 जैसे सांप्रदायिक हालात फिर से पैदा हो सकते हैं। चुनाव जीतने के लिए एक विशेष धर्म को निशाना बनाना लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

6. अंतरराष्ट्रीय मीडिया का नजरिया: UK TV Global की राय

एक वैश्विक न्यूज़ नेटवर्क के तौर पर UK TV Global यह मानता है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में धर्म के आधार पर वोट मांगना न केवल चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के भी खिलाफ है। बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा मुस्लिम समुदाय के बारे में "गंदी सोच" प्रदर्शित करना भारत की छवि को वैश्विक मंच पर धूमिल करता है।


निष्कर्ष: सत्ता की भूख या समाज का बंटवारा?

असम चुनाव 2026 केवल सत्ता हासिल करने की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह असम की आत्मा को बचाने की लड़ाई बन गई है। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के वायरल बयान यह साबित करते हैं कि चुनाव जीतने के लिए बीजेपी किसी भी हद तक ध्रुवीकरण कर सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या चुनाव के बाद ये जख्म भर पाएंगे?

UK TV Global अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए यह अपील करता है कि जनता इन नफरती बयानों के पीछे के असली सच को समझे और विकास, शिक्षा व रोजगार जैसे वास्तविक मुद्दों पर अपना फैसला सुनाए।


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यह लेख UK TV Global के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। रिपोर्टिंग: टीम UK TV Global, असम डेस्क।